Vaishvik Samasyayen – समसामायिक विश्व की समस्या

Vaishvik Samasyayen
Vaishvik Samasyayen

समसामायिक विश्व की समस्या – Vaishvik 

प्राचीनकाल से ही मनुष्य की विस्तारवादी (Vaishvik) सोच के कारण उसने दूसरे लोगो की स्वतंत्रता का अतिक्रमण करने की कोशिश की है। यह सोच जब हद पार कर लेती है तो दुनिया में विनाश लाती है।

प्रथम विश्व युद्ध एवं द्वितीय विश्व युद्ध भी इसी साम्राज्य विस्तारवाद के कारण हुए है। मनुष्य यह समझता है कि वह सर्वशक्तिमान है। वह प्रकृति और अन्य प्राणियों को अपना गुलाम बनाकर अपने अनुसार चलाना चाहता है। 

हम सभी जानते है कि मानव सभ्यता का विकास यकायक नहीं वरन धीरे – धीरे कई सदियों से हो रहा है। वर्तमान में भी मानव अपने विवेक से कई खोजे कर रहा है। मनुष्य ने ही अपनी बुद्धि और पुरुषार्थ से आग से लेकर आधुनिक रॉकेट का अविष्कार किया है। मनुष्य ने आज पृथ्वी के आलावा अन्य ग्रहों पर भी अपनी पहुँच बना ली है।

सृष्टि का एक शाश्वत

सृष्टि का एक शाश्वत नियम यह है कि विकास करने के लिए तो पुरुषार्थ करना पड़ता है परन्तु विध्वंस करने के लिए कोई विशेष पुरुषार्थ नहीं करना पड़ता है। पानी को पहाड़ पर चढ़ाने के लिए अत्यधिक जतन करना पड़ता है। परन्तु उसी पानी को पहाड़ से निचे लाने में कोई विशेष प्रयत्न नहीं करना पड़ता केवल ढलान से गिरा देने से पानी स्वयं निचे चला जायेगा।

अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने हेतु अत्यधिक शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन की आवश्यकता होती है। परन्तु उल्कापिण्ड को धरती की कक्षा में आने की लिए तो गुरुत्वाकर्षण बल ही काफी है।

वर्तमान समस्या

उरोक्त उदाहरण वर्तमान परिपेक्ष्य में दिए जा रहे है। आज सम्पूर्ण विश्व corona virus से फैलने वाली महामारी से जूझ रहा है। (Vaishvik) सम्पूर्ण विश्व सृष्टि के इस शाश्वत नियम विध्वंस के कारण स्वयं को बेबस महसूस  रहा है।

परन्तु ज्वलंत समस्या यह है कि यह महामारी आखिर आती क्यों है ? यह कोई प्राकृतिक प्रकोप है या मानव निर्मित है ?

दोस्तों विश्व में corona virus की जानलेवा महामारी फैली हुई है। इस महामारी से लाखो लोगो की मौत हो चुकी है। कई देशों की आर्थिक व्यवस्था धराशाई हो रही है।

विश्व के इतिहास में यह पहला मौका नहीं है जब किसी महामारी ने मानव सभ्यता को तहस – नहस करने का प्रयास किया है। इससे पहले भी कई बार बड़ी – बड़ी महामारियों ने विश्व के विकासक्रम को बाधित किया है। 

कुछ वर्षों पहले केदारनाथ तीर्थ स्थल पर बादलों का फटना और सेकड़ो लोगो का मरना किस और इशारा करता है। इस प्राकृतिक आपदा का मूल कारण तो अंततः मानव की महत्वाकांक्षा ही है। केदारनाथ में लोगो ने व्यापार व्यवसाय बढ़ाते – बढ़ाते नदी के प्राकृतिक बहाव के रास्ते में अतिक्रमण कर लिया।

मनुष्य के द्वारा प्रकृति का अतिक्रमण करना ही प्राकृतिक आपदाओं का कारण है।

Corona Virus Epedemic भी संभवतः प्राकृतिक हो परन्तु प्रकृति की इस विषमता का कारण आखिर क्या है ? चीन का वुहान शहर जहाँ बीमारी ने विकराल रूप लेकर महामारी का रूप लिया था। वही चीन साम्राज्य विस्तार निति (Vaishvik) के कारण विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनने की सोच रहा है।

चीन के लोग सदैव ही प्रकृति के नियमों के विरुद्ध चलते है। चीन केवल भौतिकवाद को ही सबकुछ मानता है।

भारतीय संस्कृति – Vaishvik 

भारतीय वेद, पुराण एवं ग्रंथो में भी अहंकार के कारण मानव का विनाश होना समझाया गया है। पुराणों और ग्रंथो की बातों को वास्तविक सिख नहीं लेकर उसको कतिपय लोगो से जोड़कर धर्म का नाम दे दिया गया है। जबकि पुराणों में यह कहीं नहीं कहा गया है है कि वह अमुक धर्म के लोगो की वकालत करते है।

फिर भी यदि संकीर्ण विचारधारा वाले लोग यदि इसको धर्म से जोड़कर देखे तो भी कोई धर्म यह नहीं सिखाता कि दूसरे के अधिकारों का हनन करों। पुराणों एवं ग्रंथों में प्राणी मात्र को अहंकार नहीं हो इसलिए पुराणकारों ने एक परमसत्ता की रचना की है। उस परमसत्ता को अलग – अलग नाम दिए गए है। वह सभी शक्तियों मनुष्य को “जियो और जीने दो” का सन्देश देती है। 

सभी मानव सभ्यताओं ने भी “जियो और जीने दो”  सिद्धांत का जब तक अनुकरण किया तब तक उनका विकास हुआ। लोगो ने जब भी इस सिद्धांत के विपरीत जाने की चेष्टा की विश्व में विध्वंस ही हुआ है। 

पूरी मानव जाती को यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए की विकास के लिए अत्यधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है परन्तु विध्वंस के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता है। 

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