Sahas – साहसी और बुद्धिमान युवक

साहस और हिम्मत की कहानी
साहस और हिम्मत की कहानी

बुद्धिमानी और निडरता – Sahas

दोस्तों यदि व्यक्ति में बुद्धिमानी और निडरता (Sahas) हो वह जीवन में अपनी मौत को भी टाल सकता है। व्यक्ति को ईश्वर ने वह विवेक दिया है जिससे  वह चाहे तो अपने ऊपर आयी हुई किसी भी परेशानी से लड़ सकता है।

जीवन में अपने विवेक से निर्णय लेने वाले ही सफल हो पाते है। उन्हें कभी भी निराशा हाथ नहीं लगती है जो धैर्यवान और साहसी होते है। जो व्यक्ति विषम परिस्थितियों में अपनी बुद्धि और साहस से काम करता है वह शीघ्र ही परिस्थितयों को अपने नियंत्रण में कर लेता है। 

बुद्धिमान युवक

उज्जैयनी नगरी में एक निडर और साहसी (Sahas) युवक रहा करता था। उसे ज्ञात हुआ कि राज्य के राजा के निः संतान मर जाने के कारण नए राजा की तलाश हो रही थी। उस युवक ने इस हेतु स्वयं का नाम प्रस्तावित किया ।

राज्य के मंत्रियों ने उसे बताया की तुमसे पहले भी अनेक लोग इस हेतु आये है, परन्तु किसी शापवश उनमे से प्रत्येक का निधन राज्याभिषेक की रात्रि में ही हो गया। जीवन सुरक्षित चाहते हो तो ऐसा न करो। युवक निडर और साहसी था उसने बिना किसी भय के चुनौती स्वीकार कर ली।

राज्याभिषेक होने के बाद उसने विचार किया कि अवश्य किसी देव या दानव को रोष इस राज्य पर रहा होगा। उसको संतुष्ट कर लेने से आगत समस्या से बचा जा सकता है। उसने रात्रि में अपने कक्ष में अनेक व्यंजन बनवाकर रखे और स्वयं एक कोने में तलवार लेकर बैठ गया।

रात को इन्द्र का द्वारपाल, अग्निवेताल वहाँ आया उन व्यंजनों को देखका प्रसन्न हो गया। उन्हें ग्रहण करके वह बोला – “राजन यदि तुम नित्य ऐसी व्यंजनों का प्रबंध करो तो में तुम्हें अभयदान दूँगा।” राजा ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और उससे कहा – “तुम देवराज इन्द्र से यह पूछकर बताओ कि मेरी उम्र कितनी है ?”

अगले दिन अग्निवेताल ने उसे बताया – उसकी उम्र सौ वर्ष है।” यह सुनते ही राजा ने तलवार अग्निवेताल की गरदन पर रख दी और कहा – “इसका अर्थ है कि तुम मेरा अंत सौ वर्ष के पहले नहीं कर सकते।” अग्निवेताल राजा की बुद्धिमता व निडरता से अत्यंत प्रसन्न हुआ और उन्हें अक्षुण्य राज्य का वरदान दिया। वह राजा ही आगे चलकर महाराज विक्रमादित्य के नाम से जाने गए। 

कहानी से शिक्षा

इसीलिए बुद्धिमानी और निडरता (Sahas) से मौत को भी जीता जा सकता है। व्यक्ति को कभी परेशानियों और असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। उनका सामना करना चाहिए।

विपत्ति व्यक्ति की परीक्षा लेने के लिए ही आती है। विपत्ति हमें सिखाती है कि हम कैसे प्रतिकूलता का सामना करते है। यदि हम उनसे घबरा जाते है तो वो हम पर हावी हो जाती है।

परन्तु यदि हम सूझबूझ से उनका सामना करते है तो उनपर हम हावी हो जाते है। स्वयं दुखों से डरकर आत्महत्या करने से बेहतर है हम दुखों को ही नष्ट कर दे । 

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