Purana in Hindi-पुराण क्या है ?-पुराण कितने है ?

Purana in Hindi

अर्थ – पुराण क्या है?

पुराण Purana in Hindi का शाब्दिक अर्थ प्राचीन या पुराना होता है। इनकी रचना मुख्यतः संस्कृत में की गयी है। क्षेत्रीय भाषाओ में भी पुराण लिखे गए है। इनका रचनाकाल वेदो की रचना से बाद का है। वेद में पुराणों का शाब्दिक अर्थ पुराण पत्रापग मगनंतरम बताया गया है। शथपथ ब्राह्मण में पुराण को पांचवा वेद कहा गया है। हिन्दू धर्म या सनातन धर्म के सम्बन्ध में वर्णन पुराणों में मिलता है। 18 पुराणों में अलग – अलग देवी – देवताओं को केंद्रीय पात्र मानकर कथाये कही गयी है। इनमे पाप – पुण्य, धर्म – अधर्म, कर्म – अकर्म की बाते बताई गयी है। कुछ पुराणों में तो सृष्टि के आरम्भ से अंत तक की घटनाओ का उल्लेख है।

ऋग्वेद के अनुसार पुराणों का आविर्भाव ऋग, साम, यजुस और छंद के साथ ही हुआ है। महाभारत में कहा गया है कि वेद का विस्तार पुराणों में करना चाहिए। वास्तव में पुराण वेदो की जटिल भाषा का सरलीकरण है। महर्षि वेद व्यास जी ने वेदो को आधार मानकर पुराणों की रचना की है। जिनमे निर्गुण निराकार की सत्ता को मानते हुए सगुण साकार ईश्वर को चित्रित किया गया है। प्रेम, भक्ति, त्याग, सहनशीलता, सेवा आदि मानवीय गुणों का वर्णन है। इन गुणों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। वेदो में कर्मकांड, उपनिषदों में ज्ञान है। जबकि पुराणों में सगुण भक्ति के माध्यम से मोक्ष का रास्ता बताया गया है।

विषय – Purana in hindi

पुराणों में हर प्रकार के विषयो का समावेश किया गया है। ब्राह्मण विद्या, राजाओं, नायको, ऋषि मुनियो की वंशावली, लोककथाएं, तीर्थ यात्रा, मंदिर, खगोल शास्त्र, व्याकरण, खनिज विज्ञान, हास्य, प्रेमकथा, धर्म एवं दर्शन जैसे कई विषय है। इनमे विष्णु, वायु, मतस्य और ऐतिहासिक राजाओ की वंशावली मिलती है। अमर कोष के अनुसार पुराणों के पांच लक्षण बताये गए है। सृष्टि, प्रलय, वंश (देवता और ऋषियों के), चौदह मनुओ के काल, वंशावली (सूर्य और चंद्र वंश) का उल्लेख हो वही पुराण है ।

महत्व – Purana in hindi

पुराण मनुष्य को धर्म और निति के अनुसार चलने की शिक्षा देते है। प्राचीन काल से ही पुराण ऋषियों, देवताओं और मनुष्यों का मार्गदर्शन करते रहे है। ये मनुष्य को नैतिक कर्म करने की प्रेरणा देते है और दूषित कर्म करने से रोकते है। इनमे अवतारवाद की स्थापना की थी। पुराणकारों ने देवताओ की दुष्प्रवृतियों का विस्तृत वर्णन किया है।

संख्या – Purana in hindi

पुराणों 18 purana in hindi की संख्या अठारह है। विष्णुपुराण के अनुसार 18 पुराण के नाम इस प्रकार है – ब्रह्म पुराण, पद्म, विष्णु, वायु, भागवत, नारद, मार्कण्डेय, अग्नि, भविष्य, ब्रह्मवैवर्त, लिंग, वराह, स्कन्द, वामन, कूर्म, मत्स्य, गरुड़ एवं ब्रह्माण्ड पुराण।

इनके उपपुराण भी है जिनकी संख्या चौविस है। उपपुराण इस प्रकार है – आदि पुराण, नरसिंह, नंदी, शिवधर्म, आश्चर्य, नारदीय, कपिल, मानव, उशना, ब्रह्माण्ड, वरुण, कलिका, माहेश्वर, साम्ब, सौर, पराशर, मारीच, भार्गव, विष्णुधर्म, बृहद्धर्म, गणेश, मुद्गल पुराण, एकाम्र एवं दत्त पुराण

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