Parivarik Shiksha – पारिवारिक शिक्षा का महत्व

Parivarik Jeevan Shiksha
Parivarik Jeevan Shiksha

पारिवारिक शिक्षा की अविरल प्रक्रिया – Parivarik Shiksha

दोस्तों पारिवारिक शिक्षा (Parivarik Shiksha) की अविरल प्रक्रिया चलती रहती है। वैसे तो जीव जन्म से लेकर मरण तक सीखता ही रहता है। जब तक उसमे सिखने की ललक है तब तक उसका विकास होता है। व्यक्ति उन सभी सजीव और निर्जीव तत्वों से सीखता जिनसे वह संपर्क में आता है। व्यक्ति सीखना तभी बंद करता है जब उसे सीखे हुए का अहंकार आने लगता है। 

गूगल गुरु और यूट्यूब के युग में गुरु – शिष्य परम्परा कहीं ना कहीं तिरोहित हो रही है। पहले गुरुकुल शिक्षण पद्धत्ति में गुरु एक बालक का निर्माण करते थे। आज यह जिम्मेदारी डिजिटल माध्यमों ने ले है। शिष्य ही नहीं गुरु भी व्यावहारिक रूप से बदल रहे है। आज रोजगारोन्मुखी शिक्षा तो दी जा रही परन्तु जीवनोपयोगी विद्या कहीं ना कहीं छूट रही है।

दोस्तों बालक की शिक्षा घर से ही शुरू हो जाती है। बालक के पहले गुरु दादा – दादी, माता – पिता, बड़े भाई – बहिन और यहाँ तक की उम्र में छोटे भी उसे कुछ ना कुछ सिखाते है। थोड़ा बड़ा होने पर दोस्त और युवावस्था में जीवन साथी और प्रौढ़ावस्था में उसकी संताने व्यक्ति को कुछ ना कुछ सिखाती है।

पारिवारिक गुरु – 

दोस्तों जहाँ तक मेरे परिवार (Parivarik Shiksha) के गुरुओं की बात है। मैंने अपने दादा – दादी से सादगी और श्रम की सिख ली है। मेरे पिताजी – माताजी से मैंने जितना सीखा है मैं उसे कुछ शब्दों में तो नहीं लिख सकता परन्तु फिर भी पापा से काम के प्रति लगन, आत्मविश्वास, साहस, और एक निष्काम कर्मयोगी होने के सभी गुण मुझे उनसे सिखने को मिले।

माँ तो अनंत ममतामयी है उनसे मैंने परिवार के लिए जीना सीखा है। बड़ी दीदी में भी मैंने माँ के गुण देखे । दीदी भी परिवार को एकसाथ लेकर चलना सिखाती है।

बड़े भय्या और मेरे व्यव्हार में चाहे जमीन आसमान का अंतर ही क्यों नहीं है। मैंने उनसे आत्मविश्वास, साहस के साथ विषम परिस्थितियाँ में निडरता से जीना सीखा है।

भाभी माँ से मैंने परिवार में प्रेम से रहना सीखा है। मेरी जीवन संगिनी से मैंने आत्मविश्वास और दृढ इच्छाशक्ति से सपनों को पूरा करना सीखा है। 

दोस्तों ऐसा नहीं है कि जिनको हम सजीव या निर्जीव रूप में गुरु मानते है उनमे कोई कमी नहीं होती है। परन्तु शिष्य को शारीरिक व्यवहारिक गुणधर्म नहीं विद्या पर ध्यान देना चाहिए। 

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