Language Functions & Features – भाषा की विशेषतायें एवं कार्य

Language functions

आज हम भाषा (Language Functions) की विशेषताओं एवं कार्यों के बारे में चर्चा करेंगे। व्यावहारिक जीवन में भाषा के महत्व और कार्य को सभी भलीभांति जानते है। भाषा की सैद्धांतिक और सामाजिक विशेषतायें और कार्य भी होते है। भाषा की यह विशेषताएं एवं कार्य सभी देश काल में बोली जाने वाली भाषाओँ के लिए सामान होते है।

परम्परागत और अर्जित विशेषता – Language Features

भाषा को परंपरागत रूप से सीखा जाता है। भारत के अलग – अलग राज्यों में रहने वाले बालको को वहॉं बोली जाने वाली भाषा को कोई सिखाता नहीं है। अपने माता-पिता और स्वजनों को देखकर बालक स्वयं ही परम्परागत रूप से सीखते जाते है। इस तरह से भाषा में अर्जित होने की विशेषता होती है। भारतीय लोगो ने विदेशी भाषाओं को अर्जित किया है तो दूसरी और विदेशी लोगो ने भारतीय भाषाओँ को अर्जित किया है। भाषा सामाजिक निधि है अर्थात जिस समाज में जिस भाषा का प्रचलन होता है व्यक्ति उस भाषा को अपनाता है।

परिवर्तन की विशेषता – Language Features

किसी भी समाज की भाषा सदैव एक जैसी नहीं रहती है। आज जो भाषा हम बोलचाल में लाते है, 100 वर्षों पहले उसका रूप ऐसा नहीं था। भाषा का निरंतर परिमार्जन होता रहता है। उसमे नए शब्द और नियम जुड़ते जाते है और वह परिष्कृत होती जाती है। कई भाषायें या बोलियाँ लुप्त भी हो जाती है। विभिन्न भाषाओँ के व्याकरण के नियमों के कारण भाषा का विकास बाधित होता है। भाषा का विकास हमेशा कठिन से सरल की और होता है। अर्थात भाषा व्याकरण के कठिन नियमों से होते हुए साधारण बोलचाल में आती है।

कक्षा कक्ष में भाषा के कार्य – Language Functions

शिक्षक और छात्रों के मध्य सवांद का मुख्य आधार भाषा है। बालक की रूचि जानना एवं छात्रों से आत्मीय सम्बन्ध बनाने में भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कक्षा में व्यवस्था बनाये रखने के लिए भाषा अत्यंत आवश्यक है। छात्रों को लिखित एवं मौखिक कार्य भाषा के माध्यम से ही करना होते है। भाषा के मौखिक रूप से स्वानुशासन की भावना विकसित करने के निर्देश दिए जाते है 

भाषा के व्यावहारिक कार्य – Language Functions

भाषा के माध्यम से एक व्यक्ति सम्पूर्ण समाज से अपने विचारों का आदान – प्रदान करता है। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच का भाषा संवाद सामाजिक व्यवहारों को पूर्ण करने के लिए किया जाता है। यह व्यवहार सामान्य शिष्टाचार, सुचना, आदेश, प्रेमालाप, मंत्रणा या आत्माभिव्यक्ति के लिए किया जाता है। 

भाषा के सामाजिक कार्य – Language Functions

सामजिक रूप से भाषा विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग लायी जाती है। धर्म, दर्शन, अर्थ, राजनीति, कला, साहित्य एवं विज्ञान में जो भी लेखन और वाचन होता है भाषा के माध्यम से ही होता है।  साहित्य की रचनात्मकता और संगीत की रसानुभूति का आनंद भाषा से ही संभव है। भाषा के माध्यम से प्रेरणादायी शिक्षा दी जाती है। साहित्य एवं संगीत को भाषा के द्वारा ही आत्मसात किया जाता है। 

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