Karm Ka Sidhant Kya Hai – कर्म सिद्धांत क्या है ?

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Karm Ka Sidhant Kya Hai

कर्म सिद्धांत – Karm Ka Sidhant Kya Hai

दोस्तों भगवान बुरे कर्मों की सजा देते है या नहीं देते है (Karm Ka Sidhant Kya Hai) इससे पहले हमें भगवान के अस्तित्व को समझाना होगा। वैदिक काल के अनुसार जब सभी और सुख समृद्धि थी। मानव देवताओं अर्थात ग्रहों को पूजकर इच्छित फल प्राप्त करते थे।

यह सिलसिला लम्बे समय तक चला। देवताओं का अत्यधिक पूजन होने के कारण उनमे अभिमान और अन्य दुर्गुण विकसित होने लगे। जिस तरह से आज किसी व्यक्ति विशेष की बहुत पूछ परख होने पर उसमे अभिमान आ जाता है।

पुराणों की रचना 

इस कारण बुद्धिजीवी ऋषि – मुनियों ने पुराणों की रचना की उनमे यज्ञ की अपेक्षा भक्ति पर अधिक जोर दिया गया। उन्होंने निराकार ईश्वर जो अभी तक वेदों के यज्ञों निहित शक्ति थी उसी शक्ति को साकार रूप देना प्रारम्भ किया। ऋषिओं ने कई पुराणों की रचना की और उनमे गलत कर्म करने और अहंकार के वशीभूत हुए देवताओं को सजा देना बताया गया।

वास्तव में पुराणों में वर्णित कहानियाँ उन्होंने मानव और देवताओं के दुर्गुणों पर विजय प्राप्त करने हेतु रची थी। कालांतर में समाज के एक विशेष तबके ने उन्ही कहानियों के माध्यम से लोगो को डराने का व्यापर आरम्भ कर दिया।

साकार ईश्वर 

वास्तव में पुराणकारों ने यह समझाने का प्रयास किया था कि ईश्वर कण – कण में व्याप्त है। और यदि ईश्वर कण – कण में व्याप्त है तो व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति का अहित कैसे कर सकता है। क्योंकि सभी में परमात्मा का रूप है। परमात्मा कभी किसी को सजा नहीं देते वरन गलत करने वाले के कर्म ही उसे सजा देते है।

यह तो आज का विज्ञान भी मानता है कि क्रिया की प्रतिक्रिया अवश्य होती है। यदि आपने किसी के साथ कोई गलत व्यवहार किया है तो कभी ना कभी उस गलत व्यव्हार का परिणाम आपको किसी न किसी रूप में भुगतना ही पड़ेगा।

अंत में इसका एक निष्कर्ष है कि भगवान कभी किसी को ना अच्छे कर्म का फल देते है ना ही किसी को बुरे कर्म की सजा देते है। मानव के अच्छे – बुरे कर्म ही मानव को परिणामस्वरुप प्राप्त होते है। यही कर्म सिद्धांत (Karm Ka Sidhant Kya Hai) है।

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